परेतनी की शादी - 3

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वे वस्त्र किसी राज महाराज को भी मात करने वाले वस्त्र थे। रेशमी रंग असली सोने की कढ़ाई वाले चमचमाते हुए वस्त्र ! जैसे अभी के अभी सीलकर आए हो। मैंने पहना और बिल्कुल मेरी साईज के थे वे।ऐसा लगा। जैसे नाप लेकर सीले ग‌ए हो।तभी आवाज आई,आओ चले,,,,,,मैंने मुड़कर देखा तो वही सुन्दर युवती ने राजकुमारी के जैसे परिधान पहने खड़ी थी। मैं मंत्रमुग्ध सा उसकी ओर बढ़ा चला। उसने मेरा हाथ पकड़ा और आगे बढ़ गई।वो मुझे एक बड़े से डाइनिंग टेबल पर ले ग‌ई ।उस टेबल पर ढेर सारे पकवान और खाद्य पदार्थों से भरा पड़ा था।मैंने पहली