महा-सुरक्षा कवच का निर्माणकार्तिक ने अपने झोले से बचा हुआ सारा सामान निकाला। उसने पवित्र विभूति (भस्म) से उन आठों बेहोश दोस्तों के चारों ओर एक विशाल घेरा बनाना शुरू किया।वह साधारण घेरा नहीं था, बल्कि उसने हर दोस्त के माथे पर तिलक लगाया और फिर उनके चारों तरफ ॐ की आकृति बनाई।उसने रूही से कहा, "रूही, तुम त्रिशूल लेकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठो और निरंतर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करो। मैं इस घेरे को गंगाजल से अभिमंत्रित करता हूँ।"कार्तिक ने गंगाजल की बोतल उठाई। जैसे ही उसने मंत्रों के साथ जल की बूंदें ज़मीन पर छिड़कना