यह कैसा अहसास - भाग 4

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 ■यह कैसा अहसास भाग 04Written by H K Bharadwaj________________________________________________________________________________एक दिन मै अपने कमरे मै  बैठा अपनी हाई स्कूल की वार्षिक परीक्षा की तैयारी अपने कमरे में बैठा हुआ कर रहा  था। कि ठीक उसी समय अचानक एक ठंडा शीतल वायु का झोका पता नही कहाँ से एक नई गन्ध जो परिचित सी लग रही थी, लिये मेरे कमरे में घुसा।            मै चौंक कर इधर उधर देखने लगा कि  यह मस्त खुशबू बाला झोका कहाँ से और किस रास्ते से मेरे कमरे में घुसा था, कि अचानक मैने सामने खिडकी की ओर देखा, और तभी मै