महक जैसे ही हॉल में दाखिल हुई, हल्की-सी हलचल हुई। कई लोगों ने उसकी ओर देखा — उसकी सादगी, उसकी मुस्कुराहट और उसके चेहरे की वो शांत चमक जैसे सबको कुछ पल ठहरने पर मजबूर कर रही थी।हाल की हल्की रौशनी, सामने सजा हुआ मंच, और पीछे बजता धीमा संगीत — सब कुछ मानो किसी पुराने ख़्वाब जैसा लग रहा था।महक ने मंच के किनारे खड़े हो कर गहरी साँस ली।“स्कूल में तो जाने कितनी बार स्टेज पर बोला है… पर आज... ये घबराहट क्यों हो रही है?”शायद इसलिए कि आज वो सिर्फ एक भाषण नहीं, अपना अस्तित्व बोलने जा