यह कैसा अहसास - भाग 1

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■ यह कैसा अहसास■       भाग 01Written by H K Bharadwaj__________________________________________________________________________________________बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार  दादीअम्मा के पीहर में रहता था।पिताजी बैसे भी दादा जी के सानिध्य में हमें छोड़कर अपनी ड्यूटी पर जा चुके थे।दादाजी दिन भर चौपाल पर बैठे हुक्का गुड़गुड़ाते रहते थे,इस गांव के घर जवाँई होने के नाते सभी लोग उनका सम्मान करते थे,।दादा जी के दो बेटे थे एक बड़े जो