जिस जीवन में तुम थे - 4

  • 1.3k
  • 404

कुछ दिनों बाद समर को एक और पत्र मिला।इस बार कागज़ के साथ एक पुरानी तस्वीर थी।लेकिन तस्वीर में कोई चेहरा नहीं था।सिर्फ़ एक रेलवे स्टेशन,खाली प्लेटफ़ॉर्म,दूर जाती हुई पटरियाँ।पीछे धुँधला सा आकाश।पत्र में लिखा था"मैंने यह तस्वीर पच्चीस वर्ष पहले खींची थी।मुझे हमेशा लगता रहा कि जीवन रेलवे स्टेशन जैसा है।कुछ लोग हमारे पास बैठते हैं।कुछ देर बातें करते हैं।फिर अपनी ट्रेन आने पर चले जाते हैं।हम उन्हें रोक नहीं सकते।हम केवल उनकी अनुपस्थिति के साथ जीना सीख सकते हैं।"समर ने उस तस्वीर को बहुत देर तक देखा।फिर उसने धीरे से उसे अपनी डायरी में रख लिया।उसी गुलमोहर के