रितांश के हाथ काँप रहे थे। डायरी के पन्ने एक-एक करके खुल रहे थे। हर पन्ने के साथ उसकी दुनिया बदलती जा रही थी।उसने आगे पढ़ा—रितांश...तुम न तो पूरी तरह इंसान हो...और न ही पूरी तरह शैतान।उसकी साँसें रुक सी गईं।आगे लिखा था -तुम दोनों दुनियाओं के बीच की कड़ी हो।तुम्हारे अंदर तुम्हारी माँ की शक्ति है...और इंसानों का दिल भी।रितांश ने मुट्ठियाँ भींच लीं। अब उसे समझ आने लगा था कि उसके साथ बचपन से अजीब चीज़ें क्यों होती थीं। उसने अगली पंक्ति पढ़ी। और इस बार उसकी आँखें फैल गईं।आगे लिखा था -मेरे बेटे...अगर तुम यह पढ़ रहे