-------------समय ------------- वही वक़्त कि लहरें जो अक्सर दिमाग़ मे उठती है। ग्रेवाल एक दम से सोच ने लगा," कया बलजीत को कल का कुछ भी मालम नहीं, कया बता कर नहीं गया होगा, तीन बच्चो का बाप " ग्रेवाल घर मे था। ऊपर छत पर था, साथ कोई नहीं, अकेला.... बलजीत सिंह कहा चला गया, इतनी दुनिया बड़ी... बच्चा तो है नहीं... आ जायेगा। किसी कश्मक्ष मे ग्रेवाल..... आज कलाज का लेक्चर था... नागरिक शास्त्र का... पूजीवाद और रुपया गण्ड मे हो तो कैसे कोई मार्किट मे लगाए। ये किसी कि पैसे की उथल पुथल समेटना हर कोई कर सकता