जब रिश्ता प्यार बन जाए. - 9

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Episode 9 – वो सच जो कहना ज़रूरी था सुबह की रोशनी कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी।पर Priyam की आँखें रात से ही खुली थीं।नींद आई ही नहीं थी।वह बिस्तर पर चुपचाप लेटी थी,छत को देखती हुई,और दिमाग़ में एक ही बात घूम रही थी—“अब और टालना ठीक नहीं।”कुछ बातें ऐसी होती हैंजो जितना दबाओ,उतनी ही भारी होती जाती हैं।और Priyam उस वक़्तठीक वही महसूस कर रही थी।नीचे किचन में माँ चाय बना रही थीं।घर में रोज़ जैसा माहौल था,पर Priyam को सब कुछ बदला-बदला लग रहा था।वह चुपचाप जाकर माँ के पास खड़ी हो गई।“कुछ कहना है?”माँ ने बिना