"यह किताब नहीं है" अध्याय 1: उधार का बोझ — हम कैसे फँसे?कहाँ से शुरू हुआ:बच्चा पैदा होता है — खाली। फिर माँ-बाप, स्कूल, समाज, धर्म सब मिलकर उसके खालीपन पर लिखना शुरू करते हैं। नाम, जाति, देश, भगवान, पाप-पुण्य। धीरे-धीरे वो ‘मैं’ बन जाता है जो असल में उधार का जोड़ है।पकड़:हम सोचते हैं हम सोच रहे हैं। असल में हमारे भीतर गीता बोल रही है, कुरान बोल रहा है, न्यूज़ चैनल बोल रहा है। अपना स्वर दब गया।जाँच:एक दिन बैठो। जो भी पक्का विश्वास है — ईश्वर, पैसा, इज़्ज़त — पूछो: “ये मेरा है या किसी ने दिया?” जो