किराए का घर

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**"किराए का घर" -  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*वर्तमान समय में अपना घर होना भी एक सपना ही है। बढ़ती जनसंख्या और सीमित ज़मीन। डिब्बेनुमा जैसे घर में रहने को मजबूर लोग।यह कहानी है दिल्ली में कार्यरत दलन प्रसाद की। शादी के बाद अपनी धर्मपत्नी विनीता को अपने साथ दिल्ली लेकर आया। चौथी मंजिल पर यही कोई पचास गज का दो कमरे वाला फ्लैट। किराये के फ्लैट में बस चार दीवारों से घिरा एक फ्लोर मिलता है। ना छत अपनी ना ज़मीन अपनी। एक ही बिल्डिंग में पाँच परिवार रहते। रोज़ किसी ना किसी बात पर पड़ोसी से चिकचिक रहती। ज़ोर से