इश्क और इस्तीफा - 10

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हाथ में थमी वह पुरानी, पीली पड़ चुकी चाबी काव्या को बेहद भारी महसूस हो रही थी। यह सिर्फ एक लोहे का टुकड़ा नहीं था, बल्कि विराज के उस अतीत का द्वार था जिसे उसने पिछले तीन सालों से दुनिया की नजरों से, और शायद खुद से भी छिपाकर रखा था।कोठी की सीढ़ियाँ चढ़ते हुए काव्या के दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं। कोठी का सबसे ऊपरी हिस्सा बेहद शांत था, जहाँ धूल की एक महीन परत जमी हुई थी। जैसे-जैसे वह उस बंद कमरे के करीब पहुँच रही थी, हवा में एक अजीब सी उदासी और भारीपन साफ