मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु

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मन – ऊर्जा और शरीर का मध्य सेतु शरीर जड़ है।ऊर्जा चेतन है।इन दोनों के मध्य जो बोध उत्पन्न होता है, वही मन है।मन न पूर्णतः शरीर है, न पूर्णतः ऊर्जा।मन दोनों का सेतु है।इसी कारण मन दोनों को जान सकता है।शरीर की पीड़ा, सुख, इन्द्रिय-बोध, भूख, प्यास, सुरक्षा की चाह — सब मन तक पहुँचते हैं।ऊर्जा की शांति, आनन्द, प्रेम, करुणा, जागरूकता — इनका बोध भी मन ही ग्रहण करता है।बुद्धि मन नहीं है।बुद्धि मन का उपकरण है।मन बोध करता है, बुद्धि क्रिया करती है।मन अनुभव लेता है, बुद्धि निर्णय लेती है।इन्द्रियाँ सूचना लाती हैं, बुद्धि उनका उपयोग