नानी जी नमस्ते

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संस्मरण डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi नानी जी नमस्ते  संसस्मरण नानी जी नमस्ते  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*मेरी नानी का घर अब सिर्फ यादों में ही है। बरसो बीत गए वहां गए। आखिरी बार जब छठी कक्षा में थी, तब गई थी। नानी का घर तो अभी भी वहीं है उसी रूप में कोई बदलाव नहीं। बस अब वो घर नाना का नहीं है। मेरे नाना और नानी दोनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं। नाना और नानी अपने अंतिम वर्षों में मामा जी के घर शहर आ गए थे। जिस घर की यादें आज भी जिंदा है मेरे