माफिया कि दुल्हनिया - भाग 2

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उस रात आर्या बहुत देर तक सो नहीं पाई।बार-बार उसकी आंखों के सामने वही चेहरा आ रहा था…गहरी आंखें… चेहरे पर ठहराव… और उस ठहराव के पीछे छुपा हुआ दर्द।उसने करवट बदली और खुद को समझाने लगी।“तुम पागल हो क्या आर्या…? वो इतने बड़े आदमी हैं… और तुम बस एक साधारण लड़की।”लेकिन दिल कहां मानने वाला था।सुबह…विक्रांत अपनी कंपनी के कॉन्फ्रेंस रूम में बैठा था।सामने बड़े-बड़े क्लाइंट्स थे… करोड़ों की डील पर चर्चा चल रही थी।“सर, अगर हम इस प्रोजेक्ट में 15% और इन्वेस्ट करें तो—”“नहीं।”सब चुप हो गए।विक्रांत की नजरें फाइल पर थीं… लेकिन दिमाग कहीं और।करण धीरे से