परेतनी की शादी - 2

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 मैं खाने के मामले में बड़ा ही शातीर था। जब मै खाना खाने बैठता था तो चार पांच लोगों का खाना मै अकेले खा जाता था।इसलिए आमतौर पर लोग मुझे अपने घर खाना खाने पर बुलाने से कतराते थे। मां के गुज़र जाने के बाद मैं काम चलाऊं खाना बनाकर रोज की आदत थी। इसलिए मुझे स्वादिष्ट भोजन बहुत पसंदथा,,,,।और यहां भी मैंने दवा कर रोटियां खाता गया,,, लगभग चालीस रोटियां खाने के बाद मेरा पेट भरा था और फिर मैंने तृप्ति भरी डकार ली।और बाद में वो खाना खाने बैठ गई। मैंने उससे बात करना चाही,,,, लेकिन उसने इशारे