Bayaan - Part 9

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Part 9 डायरी का अगला पन्ना खोलते ही मैं कुछ देर तक शब्दों को देखती रह गई।पता नहीं क्यों...हर नया पन्ना पढ़ते समय मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी होने लगी थी।जैसे मैं किसी और की कहानी नहीं...अपनी ही कोई भूली हुई याद पढ़ रही हूँ।मैंने कई बार खुद को समझाया कि यह सिर्फ़ एक कहानी है।लेकिन फिर भी...जब भी अभिन्नव का नाम सामने आता, मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो जाती।मुझे समझ नहीं आता था कि ऐसा क्यों हो रहा है।आख़िर मैं उन्हें जानती भी तो नहीं हूँ।फिर भी ऐसा क्यों लगता है कि उनका नाम मेरे लिए नया