किसी-किसी रात समय सो जाता है।घड़ी चलती रहती है, रात आगे बढ़ती रहती है, लेकिन भीतर कहीं सब कुछ ठहर जाता है।उस रात समर के साथ भी यही हुआ।पत्र लिखने के बाद वह देर तक मेज़ पर बैठा रहा। कमरे में पीली रोशनी थी और उसके सामने खुली डायरी।वह कई वर्षों से लिख रहा था।लेख, टिप्पणियाँ, किताबों पर समीक्षाएँ, अधूरे उपन्यास।लेकिन उस रात जो लिखा गया था, वह साहित्य नहीं था।वह किसी ऐसे व्यक्ति से संवाद था जो अस्तित्व में भी हो सकता था और नहीं भी।अगली सुबह उसने वह पत्र एक भूरे लिफाफे में रखा।ऊपर केवल दो शब्द लिखे,"उसके