संजना ने जो एड्रेस हमें दिया था, वहाँ पहुँचते ही हमारी गाड़ी एक बेहद पॉश और आलीशान सोसाइटी के सामने आकर रुकी। ऊँची-ऊँची इमारतों और शानदार बंगलों से घिरी उस सोसाइटी का रुतबा दूर से ही महसूस किया जा सकता था। लेकिन जैसे ही हमारी नज़र उस खास बंगले पर पड़ी, जिसके सामने गाड़ी रुकी थी, हम कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। वो कोई साधारण बंगला नहीं था, बल्कि किसी राजा-महाराजा के महल से कम नहीं लग रहा था। उसकी भव्यता, उसकी चमक-दमक और उसकी शान देखते ही बनती थी। बंगले की ऊँची संगमरमर से बनी दीवारें, खूबसूरत