परेतनी की शादी - 1

(142)
  • 4k
  • 1
  • 1.9k

गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा करके मैं आराम करता था। ऐसे ही दिन गुजर रहे थे,,,,,एक रात मैं शौच के लिए निकला।दिन भर बाहर मटकते रहने के कारण मुझे किसी चीज‌ का डर नहीं था।गांव वाले जिस मशान की ओर शाम के बाद अक्सर जाने झिझकते थे। मैं बड़ी आसानी से उस मशान मे रात को भी चला जाता था।मशान मे कभी कभी