बारह बरश का इंतज़ार - 3

अगले दिन उसकी नींद बाहर से आते शोर से खुली।बाहर से हँसने की आवाज़ें आ रही थीं।कुसुम ने अपना सिर पकड़ लिया और उठकर बैठ गई।उसका सिर दर्द कर रहा था ! कल रात वो अंकित के बारे में सोचते-सोचते ही सो गई थी। उसे अपनी माँ की आवाज़ सुनाई दी “अंकित!”कुसुम हड़बड़ा कर उठ गई !  अंकित? तो क्या अंकित की फैमिली उसके घर आई है? वो आया है? क्या कर रहा है वो यहाँ...? कुसुम ने आव देखा ना ताव, और झट से बाथरूम की ओर दौड़ गई। जाते वक्त उसने घड़ी पर नज़र डाली ! सुबह के नौ बज