Devil की दास्तान - 20

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(जंगल में गहरा सन्नाटा छाया है।पेड़ों के बीच से धुंध की परतें निकल रही हैं।18 साल की मासूम सिमरन अभी भी करण की गोद में निढाल पड़ी है।उसकी साँसें थम चुकी हैं। करण की आँखों से लगातार आँसू बह रहे हैं।)करण (टूटे स्वर में, काँपती आवाज़ में) बोला - “सिमरन... उठो न... देखो मैं यहाँ हूँ...तुमसे मुझसे वादा किया था कि कभी मुझे अकेला नहीं छोड़ेगी...”(वो सिमरन के चहरे को पागलों की तरह बार-बार चूमता है,पर कोई हरकत नहीं होती। उसकी साँसें अब पूरी तरह रुक चुकी हैं।)“वो इंसान थी... और वो राक्षस...दोनों का मिलन तो किस्मत के खिलाफ़ था...”(करण का