तुमसे मोहब्बत है - 10

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Kabir पूरी रास्ते गाड़ी ड्राइव करता है,पास बैठी वाणी खिड़की के बाहर देखती रहती है।ना कोई आँसू,ना कोई शब्द —एकदम खाली।घर का गेट खुलता है।Rekha ji मुस्कुराते हुए बाहर आती हैं—Rekha ji (खुश होकर):“अरे वाणी!Congratulations beta!”वो तुरंत उसके मुँह में मिठाई रख देती हैं।वाणी बस हल्की सी मुस्कान…बहुत हल्की।साहिल जी आगे आते हैं,उसके सिर पर हाथ फेरते हैं—साहिल जी (गर्व से भरी आवाज़):“मुझे तुझ पर बहुत proud है,मेरी गुड़िया रानी…”वाणी आँखें झुका लेती है।कुछ कह नहीं पाती।उधर Kabir एकदम बच्चे जैसी शक्ल बनाकर—Kabir:“हाँ, बस… अब सब ध्यान उसी पर।मैं भी इतने महीनों बाद घर आया हूँ,उसका कोई मोल नहीं?”Rekha ji