आज दोपहर को घर के आंगन मे बैठा में आराम कर रहा था। अचानक दिमाग में कुछ लिखने का ख्याल आया। सोचा कुछ अच्छा सा लिखूं। पर क्या लिखना है ये तय नहीं कर पा रहा था। कई बार विचार आया कुछ साहित्य के उपर लिख डालू। जो बुद्विजीवी है उनके दिमाग के लिए कुछ खुराक हो जायेगी। यदी कहीं कोई पुरस्कार मिल गया तो अपनी तो बल्ले-बल्ले हो जाएगी और अगर कुछ न भी मिला तो कम से कम मोहल्ले के लोगों के बीच कुछ सम्मान सा तो हो ही जायेगा। ये सोचकर में कागज और कलम लेने के