अगली सुबह घर में हमेशा की तरह जल्दी हलचल शुरू हो गई रसोई से तवे पर सिकती रोटियों की हल्की खुशबू आ रही थी। सुषेला चुपचाप अपने काम में लगी हुई थीगैस पर एक तरफ साधारण आलू की सब्ज़ी पक रही थी, और साथ में चाय चढ़ी हुई थी न कोई खास बात, न कोई उत्साह सब कुछ सामान्य, लेकिन उस सामान्य में भी एक ठंडापन था।तुषार नींद से उठा, कुछ देर छत को देखता रहा फिर धीरे से उठकर तैयार होने चला गया जब वो हॉल में आया, महेश पहले से ही कुर्सी पर बैठे अख़बार पढ़ रहे थे