अलविदा आनंद!

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अलविदा आनंद !  जीवन में कुछ चीजें आकस्मिक हो कर बुरी तरह से  झकझोर जाती हैं, जैसे अचानक एक तेज अंधड़ आकर कुछ तोड़ फोड़ कर चला गया फिर सब शांत जैसे कुछ आया  नहीं था, बस हुई हानि को सवांरने सँभालने में लग जाते है. सोचते रह जाते हैं कि अचानक क्या हो गया? कैसे हो गया? क्यों हो गया? पर  इस विषय में सोचने पर  उनका कुछ भी तो  स्पष्टीकरण दिमाग को नहीं सूझता. लोग यह भी कहते है कि सब कुछ पूर्व  निर्धारित ही हैं.  जो भी हो वह एक भूले बिसरे मित्र की सच्ची अजब दास्तान