प्रेम की अमर महक

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सेमल के फूल और कस्तूरी की महक सांझ उतर रही थी। डूबते सूरज की लालिमा पूरे जंगल पर बिखर गई थी। जंगल के बीचों-बीच खड़ा विशाल सेमल का वृक्ष अपने लाल फूलों के कारण ऐसा लगता था मानो उसकी शाखाओं पर अग्नि जल रही हो। पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट रहे थे। हवा में पत्तों की सरसराहट थी। दूर नदी का जल सुनहरी आभा से चमक रहा था। लेकिन उस विशाल सेमल के नीचे एक कस्तूरी मृगी निश्चल खड़ी थी। उसकी आँखें डूबते सूरज को देख रही थीं, पर मन कहीं और था। उसके हृदय में एक अनजाना भय