ख़ामोशी के उस पार

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खामोशी के उस पार......देहरादून की सर्द हवाएँ हर शाम को थोड़ा और सुस्त बना देती थीं।शहर का आसमान यहाँ के लोगों की तरह था ..... सादा, पर अपने भीतर बहुत कुछ छुपाए हुए।कॉलेज की लाइब्रेरी के बाहर खड़ी आयरा कपूर अपने स्कार्फ को कसकर गले में लपेटने लगी।तीस की उम्र के बाद ज़िंदगी में ठंड कुछ ज़्यादा महसूस होने लगती है अक्सर.....शरीर में नहीं, भीतर। और ऐसा था भी,असल में जिंदगी रुखी और बेरंग सी थी।वो कॉलेज की हिंदी प्रोफेसर थी।हर दिन किताबों, कविताओं और छात्रों के सवालों के बीच बीत जाता था।बाहर से सलीकेदार, भीतर से थकी हुई।दो साल