सब्र का फल

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_लेखिका: डॉ वंदना शर्मा_---सब्र का फलएक समय की बात है। बिजनौर जिले के एक गाँव कुम्हारपुर में एक जमींदार के घर एक प्यारी सी लड़की शशिबाला का जन्म हुआ। शशी बचपन से ही मेधावी, गृहकार्य दक्ष और मृदु भाषी थी। बहुत बड़ा घर था उनका लेकिन उस समय लड़कियों को इतनी स्वतंत्रता नहीं थी कि बाहर जाके पढ़े, खेले। उस समय लड़कियों की जिन्दगी घर की चार दीवारियों में कैद हुआ करती थी। बस एक बात बढ़िया थी कि घर बड़े और खुले हुआ करते थे। पड़ोसी भी परिवार हुआ करते थे, दो घरों के बीच की दीवार छोटी रखी