रात का सन्नाटा - 2

  • 330
  • 117

रात के लगभग ग्यारह बजे थे। गाँव के बाहर बने बड़े से मैरिज गार्डन में शादी का शोर अब धीरे-धीरे कम होने लगा था। रोशनी से जगमगाता मैदान, तेज़ संगीत और लोगों की भीड़ अब खत्म होने की ओर बढ़ रही थी।चार दोस्त—अमन, रोहित, विकास और सोनू—भी खाना खाकर घर लौटने की तैयारी कर रहे थे।"यार, आज तो खाने का मज़ा ही आ गया!" रोहित ने पेट पर हाथ फेरते हुए कहा।"खासकर वो गुलाब जामुन..." सोनू हँसते हुए बोला।अमन की नज़र अभी भी मिठाई वाले स्टॉल पर थी। वहाँ बड़े से बर्तन में गुलाब जामुन बचे हुए थे।उसने इधर-उधर देखा।