Muhabbat Ek Sabaq - 4

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“क्या बात है शिफ़ा काफी लेट हो आज???”,नादिया उसका इंतेज़ार करती गेट पर ही मिल गई। वह उसकी क्लास फैलो थी और क्लास की ज़हीन (Intelligent) लड़कियों में भी उसकी गिनती होती थी। और इसलिए ही शिफ़ा की उससे काफी दोस्ती भी हो गई क्योंकि बक़ौल अनस के वह अपने ही जैसे लोगो से दोस्ती करती थी किताबी कीड़ा टाइप।“हां यार अब चलो जल्दी सर अशफ़ाक़ ने सॉलिड वाली इज़्ज़त अफज़ाई (बेइज़्ज़ती) कर देनी है फिर!!!”,वह जल्दी-जल्दी क्लास रूम की तरफ क़दम बढ़ाती हुई बोली।“क्या बात है भई। शक्ल पर भी बारह बजे हुए है तुम्हारी तो, खैरियत???”,नादिया ने पूछा