कालू की पहाड़ी - 3

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यह तय हुआ कि वे एक दिन मनाली में आराम करेंगे और अगली सुबह अपनी प्राइवेट ज़िपसी (Gypsy) से उस अनजानी पहाड़ी की ओर निकल पड़ेंगे।वे नहीं जानते थे कि डेविड जिसे 'पाखंड' और 'दुकानदारी' कह रहा था, वह दरअसल एक ऐसी सच्चाई थी जो उनकी समझ से कोसों दूर थी। मनाली की उस ठंडी रात में, जब वे सो रहे थे, तो बाहर हवाओं की सरसराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई दूर से उन्हें चेतावनी दे रहा हो। लेकिन बेंगलुरु के इन 'मॉडर्न' युवाओं ने अपने कानों में हेडफ़ोन लगा रखे थे।अगली सुबह का सूरज उनके लिए एक नई उमंग