तुषार अपने कमरे में खड़ा था। हाथ में प्रेस थी, लेकिन उसका ध्यान कपड़ों पर नहीं, कहीं और भटक रहा था। तभी दरवाज़ा खुला और महेश और सुषेला अंदर आए।महेश ने सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा, “हमें रिश्तेदारों को बुलाने की लिस्ट तैयार करनी होगी। शादी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए।”तुषार ने बस हल्का सा सिर हिला दिया इतने में सुषेला ने एक कड़वी हँसी के साथ महेश की ओर देखा।“मैंने सोचा था मेरे बेटे की शादी धूमधाम से होगी कोई खूबसूरत, किसी हीरोइन जैसी बहू आएगी इस घर में लेकिन किस्मत ने सब बर्बाद कर दिया। या