क्या सब ठीक है - 6

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भीड़ में खोया इंसान...दिल्ली जैसे बड़े शहर की सुबह हमेशा शोर से शुरू होती थी। सड़क पर दौड़ती गाड़ियाँ, बस स्टॉप पर खड़ी लंबी लाइनें, हॉर्न की आवाज़ें और हर चेहरे पर जल्दी का भाव। ऐसा लगता था जैसे पूरा शहर किसी अदृश्य दौड़ में भाग रहा हो।उसी भीड़ का एक हिस्सा था — अर्जुन।करीब तीस साल का साधारण युवक। एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। हर सुबह जल्दी उठना, मेट्रो पकड़ना, ऑफिस जाना और देर रात थककर घर लौट आना उसकी जिंदगी बन चुकी थी।उसके पास सब कुछ था — अच्छी नौकरी, रहने के लिए फ्लैट, बैंक बैलेंस