श्रापित एक प्रेम कहानी - 84

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आलोक की बात को सुनकर वृन्दा गुस्से से एकांश की और दैखकर कहती है। " कोई जरुरत नही है। मैं खुद चली जाऊगीं। "आलोक मना तरते हूए कहती है :" नही वृन्दा , तुम्हारा अकेले जाना सही नही होगा ।"वृऩ्दा समझाते हूए कहती है :" अकेली कहां ऑटो वाला साथ होगा ना , तुम चिंता मत करो ।"इतना बोलकर वृन्दां वहां से ओटो पकड़कर चली जाती है। चतुर , आलोक और गुणा भी चला जाता है। सभी के जाने के बाद वर्शाली एकांश से पूछती है। " एकांश जी ये आलोक और चतुर दोनो आलोक के घर पर चेतन को क्यो ढुडने