श्रापित एक प्रेम कहानी - 83

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एकांश कहता है: पता नही यार इस तरह के दवाई के बारे मे मुझे कोई नॉलेज नही है। ये बेहोशी की दवाई थी क्योकी अगर ये बेहोशी की दवाई क्लोरोफॉर्म या एनेस्थीसिया होती तो हम बेहोश हो जाते मगर हम बेहोश नही हूए हम सब कुछ दैख और समझ सकते थे।" तभी वृन्दा कहती है :" ये एक तरह का पैरालाइसिस जैसा था । "एकांश कहता है:" अब ये वही जाने के ये क्या था क्योकी अगर ये पेरालिसिस था तो हमारे सारे अंग काम नही करता मगर ऐसी कुछ भी नही था । उसने कुछ ऐसी चिज का इस्तेमाल किया के