ईश्वर को हम नहीं छोड़ सकते

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ऋगुवेद सूक्ति-- (9) की व्याख्या "महे चन त्वामंद्रिव:परां शुल्काय देयाम्"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ --हे ईश्वर ! मैं ‌आपको  किसी भी मूल्य पर नहीं छोड़ सकता।मंत्र का पदानुसार अर्थ इस प्रकार है  पद~अर्थमहे ~महान् हेतु / महान् वस्तु के लिएचन ~भी, त्वाम्~आपकोअद्रिवः ~हे वज्रधारी (इन्द्र/परमेश्वर)परा ~दूर, अलगशुल्काय ~मूल्य, धन, कीमत के लिएदेयाम् ~दूँ, त्याग करूँसमग्र अर्थ_“हे वज्रधारी प्रभु! मैं आपको किसी भी बड़े मूल्य या धन के बदले भी नहीं छोड़ सकता।”या सरल भाषा में—“हे ईश्वर! संसार का कितना भी बड़ा लाभ क्यों न मिले, मैं आपको त्यागने वाला नहीं हूँ।”पूरा मंत्र अर्थ सहित --म॒हे च॒न त्वाम॑द्रिवः॒ परा॑ शु॒ल्काय॑ देयाम् ।न स॒हस्रा॑य॒ नायुता॑य वज्रिवो॒ न