मेरा पहला प्यारलेखक: विजय शर्मा एरीअध्याय 1: बचपन की गलियों मेंअमृतसर की पुरानी गलियों में मेरा बचपन बीता। वहीँ पहली बार मैंने उसे देखा था — स्कूल की नीली यूनिफ़ॉर्म में, हाथ में किताबें और आँखों में मासूम चमक। उस समय मैं सातवीं कक्षा में था और वह भी मेरी ही कक्षा में पढ़ती थी। नाम था संध्या।उसकी हँसी में एक अजीब सा जादू था। जब भी वह बोलती, लगता जैसे शब्द नहीं, कोई मधुर धुन बह रही हो। मैं अक्सर क्लास में चुपचाप उसे देखता रहता, और जब वह मेरी ओर देख लेती तो दिल की धड़कनें तेज़ हो