अस्पताल के सफेद कॉरिडोर में अजीब सी खामोशी थी।चारों तरफ दवाइयों की गंध फैली हुई थी और मशीनों की धीमी आवाज माहौल को और भारी बना रही थी।आरव वहीं खड़ा रह गया।उसके कानों में सिर्फ एक ही बात गूंज रही थी —“सिया पिछले तीन दिनों से अस्पताल में है…”उसने घबराकर सामने खड़ी महिला की तरफ देखा।“क्या हुआ है उसे?” उसकी आवाज कांप रही थी।महिला ने गहरी सांस ली।“मैं सिया की मां हूंआरव तुरंत सीधा होकर खड़ा हो गया।“आंटी… सिया ठीक तो है ना?”उनकी आंखें भर आईं।“डॉक्टर कह रहे हैं कि हालत पहले से बेहतर है… लेकिन पिछले कुछ दिन बहुत