एपिसोड 3: कैदो की पहली चाल और हीर का पलटवार कमज़ोर कश्ती थपेड़ों से डरती है, लेकिन जो लहरों को चीरने का हौसला रखते हैं, तूफ़ान उनका रास्ता खुद बदल देते हैं... — समीर ख़ानरहमान और हीर की मुलाकातें अब रोज़ का सिलसिला बन चुकी थीं। उस छोटे से अपार्टमेंट की खिड़की से आती धूप गवाह थी कि कैसे दो अलग-अलग दुनिया के लोग एक-दूसरे की रूह का हिस्सा बन रहे थे। रहमान की धुनें अब उदास नहीं थीं, उनमें हीर के आने की खुशी साफ़ झलकती थी। लेकिन इस बढ़ते प्यार की भनक अब सिर्फ हवाओं को नहीं, बल्कि कैदो को