Muhabbat Ek Sabaq - 2

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अहमद मन्ज़िल शफीक़ अहमद की मल्कियत थी। पुरानी लेकिन बेहद आलीशान हवेली, जिसके बड़े-बड़े सहन, ऊँची छतें और लकड़ी की नक्काशी वाले दरवाज़े दूर से ही उसकी शान बयान कर देते थे। घर के बाहर लगे चमेली और मोगरे के पौधे हर शाम अपनी खुशबू से पूरा माहौल महका देते। यह घर सिर्फ ईंट और पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि रिश्तों, मोहब्बतों और हँसी से आबाद एक दुनिया था। इस घर में शफीक़ साहब अपनी बेगम ज़ोहरा और दो बेटों असद अहमद और आसिम अहमद के साथ रहते थे।शफीक़ साहब और ज़ोहरा बेगम को हमेशा से एक बेटी की