ईश्वर मेरा चरवाह है

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ऋगुवेद सूक्ति-- (10)की व्याख्या "न रिष्येत त्यावत: सखा"ऋगुवेद --1/91/8भावार्थ --हे ईश्वर !आपका सखा (भक्त) कभी‌नष्ट नहीं होता। ऋग्वेद १।९१।८ का पूरा मंत्र इस प्रकार है —त्वं नः सोम विश्वतो रक्षा राजन्नघायतः ।न रिष्येत्त्वावतः सखा ॥शब्दार्थत्वम् — आपनः — हमारीसोम — हे सोमस्वरूप परमात्माविश्वतः — सब ओर सेरक्षा — रक्षा करेंराजन् — हे प्रभु/स्वामीअघायतः — पापी अथवा हानि पहुँचाने वालों सेन रिष्येत् — नष्ट नहीं होतात्वावतः — आपका आश्रय पाने वालासखा — मित्र, भक्तभावार्थहे प्रभु! आप हमें चारों ओर से दुष्टों और हानि पहुँचाने वालों से बचाइए। आपका आश्रय प्राप्त करने वाला भक्त कभी नष्ट नहीं होता। ऋग्वेद १।९१।८ के भाव — “ईश्वर के