प्राग की सर्द रात थी।व्लतावा नदी के किनारे हवा में नमी थी, और शहर की रोशनी पानी पर सुनहरी झिलमिलाहट फैला रही थी।वहीँ एक कैफ़े की खिड़की के पास बैठा था , आर्यन मल्होत्रा,अपने महंगे सूट में, पर अंदर से बेहद खाली।लोग उसे “कैसेनोवा ऑफ प्राग यूनिवर्सिटी” कहते थे।एक नाम, जो उसने खुद कमाया था ।हर पार्टी में, हर चेहरे पर मुस्कान, हर लड़की की आँखों में आकर्षण,और फिर… अगले ही हफ़्ते किसी और के साथ वही कहानी।आर्यन के लिए रिश्ते खेल थे,और प्यार… बस एक अस्थायी उत्साह।वो हमेशा कहता,“दिल एक जगह रुकता नहीं, माय