Ghost hunters - 17

दोपहर ढल रही थी सूरज की रोशनी पेड़ तक पहुँच तो रही थी लेकिन उसके नीचे खड़े लोगों तक नहीं जैसे उस जगह ने रोशनी को स्वीकार करने से इंकार कर दिया होपेड़ के नीचे रखा खुला डिब्बा उसके अंदर बंधा हुआ वो कपड़ा और उसके आसपास फैली राख—अब सब कुछ स्पष्ट संकेत दे रहे थे कि ये कोई साधारण बाधा नहींआरव चुप खड़ा था उसके चेहरे पर वही ठंडा संतुलन था लेकिन अंदर वह फैसला ले चुका था।आरव- ये हमारे तरीके का केस नहीं है।कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा।कबीर- आखिर मान ही लिया तूने।मीरा ने गंभीर स्वर