प्यार की परीभाषा - 6

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मंदिर वाली मुलाकात के बाद चीज़ें उम्मीद से ज़्यादा जल्दी आगे बढ़ गईं। दोनों परिवारों के बीच दो-तीन बार बात हुई, और आखिरकार बिना किसी ज्यादा बहस या दिखावे के शादी की तारीख तय हो गई—अगले महीने की एक साधारण सी सुबह, उसी मंदिर में। तुषार रोज़ की तरह चुपचाप उठा और बाथरूम की तरफ चला गया ठंडे पानी से मुँह धोते हुए भी दिमाग में वही बातें घूम रही थीं—शादी, जिम्मेदारियाँ, और एक अजीब सा खालीपन बाथरुम उसके कमरे में ही अटैच था जब वह बाहर हॉल में आया, तो माहौल थोड़ा अलग थापायल सोफे पर बैठी थी, चेहरा सख्त, आँखों