ऋगुवेद सूक्ति-(१२) की व्याख्या- “त्वमस्माकं तव स्मसि”ऋगुवेद --८/९२/३२भावार्थ --प्रभु ! तू हमारा है हम तेरे हैं।यह आत्मसमर्पण, आश्रय और दिव्य–संबंध का उद्घोष है।ऋग्वेद ८।९२।३२ का पूरा मन्त्र इस प्रकार है—त्वयेदिन्द्र युजा वयं प्रति ब्रुवीमहि स्पृधः ।त्वमस्माकं तव स्मसि ॥पदच्छेद —त्वया । इत् । इन्द्र । युजा । वयम् । प्रति । ब्रुवीमहि । स्पृधः । त्वम् । अस्माकम् । तव । स्मसि ॥भावार्थ —हे इन्द्र (परमेश्वर)!तेरी सहायता और संगति से हम विरोधियों एवं बाधाओं का सामना करते हैं।तू हमारा है और हम तेरे हैं। वेदों में प्रमाण --“त्वमस्माकं तव स्मसि” — “हे प्रभु! तू हमारा है, हम तेरे हैं” — इस भाव