तुमसे मोहब्बत है - 7

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वाणी अपने कमरे में जाती है।सूरज की हल्की किरणें खिड़की से छनकर अंदर आ रही थीं। कमरे में सादगी थी—कुछ किताबें, एक टेबल, एक छोटा-सा पॉट में पौधा… और एक बहुत ही शांत-सी लड़की।वाणी अलमारी खोलती है और सोच में पड़ जाती है—“क्या पहनूँ… कहीं ज़्यादा heavy ना लगे… professionalism दिखे… पर मेरी simplicity भी।”आख़िरकार वहहल्के पेस्टल रंग का एक सूती कुर्तानिकालती है, जिसके दुपट्टे में बहुत ही नाजुक-सी किनारी थी।बालों को उसने साफ़-सुथरी ढंग से बाँधा,थोड़ी-सी काजल की लकीर,हल्की-सी लिप बाम,और कानों में छोटे-से मोती के झुमके।दर्पण में खुद को देखते हुए वह धीरे-से मुस्कुराती है—वाणी:“चल वाणी… आज कोई