तुमसे मोहब्बत है - 6

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सुबह की हल्की धूप अभी पूरी तरह फैली भी नहीं थी किवाणी नींद से उठकर चुपचाप अपने कमरे से बाहर आ गई।रात देर से आने के बावजूद उसकी आदत वही थी—घर में सबसे पहले जागना और रसोई सँभालना।रसोई में पहुँचते ही वह धीरे से चूल्हा जलाती,पानी गर्म करने रखती, और सब्ज़ियाँ काटने लगती है।उसके चेहरे पर हल्की-सी थकान थी,पर उसकी आँखों में वही रोज़ वाला सुकून और ज़िम्मेदारी छिपी हुई थी।कुछ ही देर बाद पीछे से उसकी मासी, रेखा जी, नींद में बिखरे बालों के साथ रसोई में आती हैं।जैसे ही वाणी को काम करता देखती हैं,वे कमर पर हाथ