हीर-रांझा: द मॉडर्न थ्रिलर - 1

  • 333
  • 102

एक अनकहा पन्ना..."सदियों से इतिहास ने हीर-रांझा को सिर्फ तड़पते और बिछड़ते देखा है... लेकिन क्या होता अगर हीर लाचार होने के बजाय निडर होती? आइए देखते हैं आज के दौर के हीर-रांझा का एक अलग रूप..."— समीर ख़ानएपिसोड 1: धूप, धुन और वो अजनबीशिकागो की उस बहुमंज़िला इमारत के 14वें माले पर बने अपार्टमेंट की बड़ी सी काँच की खिड़की से सुबह की गुनगुनी धूप अंदर आ रही थी। धूप की वो सुनहरी किरणें सीधे फर्श पर बिखरी म्यूज़िक शीट्स और एक पुराने गिटार पर पड़ रही थीं। हवा में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन खिड़की से छनकर आती