मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। समझ नहीं आ रहा था कि जो कुछ हो रहा था, वो अच्छा था या कहीं कोई बड़ी गलती होने वाली थी। एक पल के लिए मन में डर आया, लेकिन अगले ही पल मैंने सिर झटक कर सारे नेगेटिव ख़याल बाहर निकाल दिए। “रिस्क लेने से ही किस्मत बदलती है, क्षितिज… जो डर गया, वो मर गया,” मैंने खुद से कहा।ज़िंदगी ने मुझे वो मौका दिया था, जिसका मैं कब से इंतज़ार कर रहा था। अब पीछे हटना कमजोरी होती। मैंने गहरी सांस ली, अपना कॉन्फिडेंस वापस जुटाया और धीरे-धीरे उसी दिशा